बुधवार, 28 अक्टूबर 2015

ग़ज़ल.प्यार का मतलब तो है.

ग़ज़ल .प्यार का मतलब तो है .

ये जिंदगी तेरे इस निखार का मतलब तो है ।।
देर से ही सही पर इस प्यार का मतलब तो है ।।

बहारें लाख़ आयीं हो चमन भी मुस्कुराया हो ,
मग़र तपती दुपहरी में बौछार का मतलब तो है ।।

ग़मो की फ़िक्र क्या करना ग़मो की जिंदगी सारी ।
किसी की याद में तन्हा इंतजार का मतलब तो है ।।

जरूरी है नही होना सभी का बेवफा हमदम ।
भरें हों आँख में आँशू तो इंकार का मतलब तो है ।।

लगाकर जान की बाज़ी तुम्हारे दिल को जीते जो ।
तुम्हारी शौक़ के आगे गया हो हार का मतलब तो है ।।

करे हम रोज़ कोशिस पर मिले जब न खुदा हमको ।
करो उम्मीद मत छोड़ो एतबार का मतलब तो है ।।

बेशक़ अदाओं की नुमाइस दिल बहला रही हो पर ।
किसी के रूप की चितवन दीदार का मतलब तो है ।।

कभी तुम करके देखो ख़ुद खुले दिल से इबादत को ।
मिलेगी रब की जन्नत भी संसार का मतलब तो है ।।

—-R.K.MISHRA

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मंगलवार, 27 अक्टूबर 2015

यादो के पिटारे से ....

यादो के पिटारे से ….

कशमकश से भरी जिंदगी
के समुन्द्र में गोता लगाकर
कभी – कभी खोज लेता हूँ
कुछ हसीं पल बिखरे हुए यादो के पिटारे से !!

प्रत्येक पल को जीता हूँ
भिन्न-भिन्न विधाओ में
व्‍याक्षेप के मध्य से फिर भी
छीन लेता हूँ कुछ पल मुस्कान के पिटारे से !!

बीता हुआ हर एक लम्हा
समा जाता है याद बनकर
छोड़ जाता है अमिट छाप
तन्हाई में फिर खोज लेता हूँ यादो के पिटारे से !!

फलतः जीता हूँ प्रश्नचित्त हो,
नित्य नई उम्मीद और आशाओ में
जीवन के सार का आनद पाने को
रोज मिल ही जाता हा कुछ यादो के पिटारे से !!

समेटे हुए है यथार्थ जीवन का सत्य
जिसमे भरी हुई है, खट्टी, मीठी, कड़वी
कुछ नमकीन भी मन मस्तिष्क के
इस कूड़ेदान से खोजने पर मिल ही जाते है
जीने की उम्मीद दिलाते हसीं पल यादो के पिटारे से !!
!
!
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[———–डी. के. निवातियाँ ———]

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फिर भी, मेरा भारत महान ...!

मेरा भारत महान
लाचार है किसान
बेईमान है धनवान

मेरा भारत महान

अमीर के घर खड़ी दस-दस गाडी
फिर भी महंगी गरीब की बीमारी

मेरा भारत महान

नेताओं को गर है कुछ प्यारा
तो बस कुर्सी और ठाट बाट
वहीँ सैनिकों के घर कोई देखता
उसके ज़िंदा लौटने का बाट

मेरा भारत महान

सोने की गद्दी
में विराजते हैं पुजारी
तो कहीं नन्हे हाँथ
जुटे साफ़कर दूर करते लाचारी

मेरा भारत महान

हिंदी बोलते आता है शर्म
अंग्रेजी बन रहा हमारा धर्म

मेरा भारत महान

ऐसे बहुत सी खूबियों से
भरा है पिटारा
लगे ना इस देश को
नज़र हमारा

मेरा भारत महान

कभी सोने की चिड़िया
कहलाने वाले मेरे देश में
आज हो रहा संस्कारों का अपमान
और पाश्चात्य का गुणगान

फिर भी, मेरा भारत महान …!

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कवि महोदय............!!

कवि हूँ, कल्पित बाते करना मेरा काम,
ध्येय नही मेरा करना किसी को बदनाम !!
+++++++++++++++++++++++++++
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सुनो बात
जब हुई अपनी
एक कवि से मुलाकात
बोला वो शान से,
मै रचानाएँ रोज़ लिखता हूँ
प्रतिक्रियाओ का भी
बेसब्री से इंतज़ार करता हूँ
मिलता है सुकून
जब कई बड़े कवि, लेखक
और विचारक,
बड़े वक्तव्यों में जो
मेरी पीठ थपथपाते है,
मत पूछो कैसे
मेरे मन में पुष्पों के
चमन खिल जाते है,
!
बरबस मैंने पूछ लिया,
सुनकर बहुत अच्छा लगा
तुम भी एक कवि हो,
दुसरो की रचनाये
अवश्यमेव पढ़ते होंगे
और शिष्टाचार वश
उनकी सराहना करते होगे !!
!
ताव में बोले,
मै अच्छा लिखता हूँ
तभी तो प्रशंशा का पात्र बन पाता हूँ
अब आप ही बताओ
इतनी व्यस्तता में भला कैसे
मुझे किसी की रचना पढ़ने की
कैसे फुर्सत होगी !
मै तो बस लिखता हूँ
अपनी व्यस्तता में मस्त रहता हूँ !!
!
मेरे मुख से अनायास ही
निकल पड़ा,
!
धन्य हो कवि महोदय आप !
कवि श्रेणी में हो सबके बाप !!
+++++++++++++++++++

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ग़ज़ल(खुदा जैसा ही वह होगा)

ग़ज़ल(खुदा जैसा ही वह होगा)

वक़्त की साजिश समझ कर, सब्र करना सीखियें
दर्द से ग़मगीन वक़्त यूँ ही गुजर जाता है

जीने का नजरिया तो, मालूम है उसी को वस
अपना गम भुलाकर जो हमेशा मुस्कराता है

अरमानों के सागर में ,छिपे चाहत के मोती को
बेगानों की दुनिया में ,कोई अकेला जान पाता है

शरीफों की शरारत का नजारा हमने देखा है
मिलाता जिनसे नजरें है ,उसी का दिल चुराता है

ना जाने कितनी यादों के तोहफे हमको दे डाले
खुदा जैसा ही वह होगा ,जो दे के भूल जाता है

मर्ज ऐ इश्क में बाज़ी लगती हाथ उसके है
दलीलों की कसौटी के ,जो जितने पार जाता है

ग़ज़ल:
मदन मोहन सक्सेना

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सोमवार, 26 अक्टूबर 2015

बाँट सको तो.....

आज हर कोई बाँट रहा, मुल्को की सरहदो को !
जलजले कब समझते है मजहबी हथियारों को !!
!
बाँट लो तुम चाहे जितना, मुल्को और इंसानो को !
बाँट सको तो बाँट दिखाओ, खुदा के कारनामो को !!

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काँप उठी.....धरती माता की कोख !!

कलयुग में अपराध का
बढ़ा अब इतना प्रकोप
आज फिर से काँप उठी
देखो धरती माता की कोख !!

समय समय पर प्रकृति
देती रही कोई न कोई चोट
लालच में इतना अँधा हुआ
मानव को नही रहा कोई खौफ !!

कही बाढ़, कही पर सूखा
कभी महामारी का प्रकोप
यदा कदा धरती हिलती
जब भूकम्प से मरे बे मौत !!

मंदिर मस्जिद और गुरूद्वारे
चढ़ गए भेट राजनितिक के लोभ
वन सम्पदा, नदी पहाड़, झरने
इनको मिटा रहा इंसान हर रोज !!

सबको अपनी चाह लगी है
नहीं रहा प्रकृति का अब शौक
“धर्म” करे जब बाते जनमानस की
दुनिया वालो को लगता है जोक !!

कलयुग में अपराध का
बढ़ा अब इतना प्रकोप
आज फिर से काँप उठी
देखो धरती माता की कोख !!
!
!
!

[——–डी. के. निवातियाँ———-]

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आशाओं के पंख

ये देश अब नई दिशा की ओर चल पङा है।
तो समाज का जन-जन लिए आँखो में सपना खडा है॥
है नया कुछ भी नही, फिर भी नया सब लग रहा है।
आशाओं के मार्ग में हमे अब नही कोई ठग रहा है॥

मन ये विचलित उङने को बेचैन और बेताब है।
चिङियों के पंखो में भी जोश लाजवाब है॥
क्यों ना थाम हाथ उस चिङियाँ का हम भी उङ चलें।
और ठान ले की ना दबेंगे अब किसी पैरो तले॥

लहरे भी गर्ववान हो सागर से ये कहने लगे।
होने पर विजय लोकतन्त्र की, आज आँसू क्यो मेरे बहने लगे॥
सफलता ह्में जो देर से मिली तो क्या,आँसू बहा तिरस्कार ना करो।
समय आ गया है समय बदलने का,आए हुए समय को नमस्कार करो॥

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काँप उठी धरती माता की कोख.............

कलयुग में अपराध का
बढ़ा अब इतना प्रकोप
आज फिर से काँप उठी
देखो धरती माता की कोख !!

समय समय पर प्रकृति
देती रही कोई न कोई चोट
लालच में इतना अँधा हुआ
मानव को नही रहा कोई खौफ !!

कही बाढ़, कही पर सूखा
कभी महामारी का प्रकोप
यदा कदा धरती हिलती
जब भूकम्प से मरे बे मौत !!

मंदिर मस्जिद और गुरूद्वारे
चढ़ गए भेट राजनितिक के लोभ
वन सम्पदा, नदी पहाड़, झरने
इनको मिटा रहा इंसान हर रोज !!

सबको अपनी चाह लगी है
नहीं रहा प्रकृति का अब शौक
“धर्म” करे जब बाते जनमानस की
दुनिया वालो को लगता है जोक !!

कलयुग में अपराध का
बढ़ा अब इतना प्रकोप
आज फिर से काँप उठी
देखो धरती माता की कोख !!
!
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[——–डी. के. निवातियाँ———-]

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आशाओ के पंख

ये देश अब नई दिशा की ओर चल पङा है।
तो समाज का जन-जन लिए आँखो में सपना खडा है॥
है नया कुछ भी नही, फिर भी नया सब लग रहा है।
आशाओं के मार्ग में हमे अब नही कोई ठग रहा है॥

मन ये विचलित उङने को बेचैन और बेताब है।
चिङियों के पंखो में भी जोश लाजवाब है॥
क्यों ना थाम हाथ उस चिङियाँ का हम भी उङ चलें।
और ठान ले की ना दबेंगे अब किसी पैरो तले॥

लहरे भी गर्ववान हो सागर से ये कहने लगे।
होने पर विजय लोकतन्त्र की, आज आँसू क्यो मेरे बहने लगे॥
सफलता ह्में जो देर से मिली तो क्या,आँसू बहा तिरस्कार ना करो।
समय आ गया है समय बदलने का,आए हुए समय को नमस्कार करो॥

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जज़्बा

जज़्बा
मंज़िलों को क्यों तलाशूँ मैं
जब राहें इतनी हसीन हैं
फ़िज़ा की रंगत फीकी पर गयी
मेरा तो साया भी रंगीन है

किस्मत से क्यों हारूँ मैं
हौंसलों कि जब कमी ही नहीं
ज़िन्दगी की बाज़ी वो हारा करते हैं
आसमां रूठा जिनसे ,जिनकी ज़मीं भी नहीं

हालात से क्यों डरूँ मैं
हर पल से मेरी यारी है
काँटों की चुभन का अलग मज़ा है
फूलों की जुदा खुमारी है……

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मेरी प्यरी भौजायी

आपकी अंखियों पर है हर शक्स फिदा,
कौन जाने कब खुदा ने फुरसत में इन्हे दिया बना।

आपकी कहीं इस खूबी को ना मैं भूल जायूं कि,
आपने रोते हुयों को हंसना सिखाया है।

आप सजाती हैं हर महफिल,
जिसमे आपकी हर अदा है कातिल।

इन्तहा है आपके अन्दाज की,
उसपर सोने पर सुहागा अपाकी आवाज की।

दिल जीत लेती हैं आप सबका,
पर किस्मत बुलन्द है उस एक की,
जिसपर हक है सिर्फ आप ही का।

हमारी तो बस इतनी दुआ है खुदा से,
यूंही आप मुस्कुराती रहें हया से।

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उत्साह

आस्मां हरा कर दूं
धरा नील कमल कर दूं
रोक दूं ये पहर
आज मैं क्या से क्या कर दूं
हर सफर तय हो मेरा
हर मंजिल हमसफर मेरी
हर वक्त भाग्य मेरा
हर कली मुस्कान मेरी
तो क्यों न मैं कल को आज कर दूं?

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रविवार, 25 अक्टूबर 2015

कश्मीर हैं हिन्दुस्तान का

कश्मीर हैं हिन्दुस्तान का
हैं प्रतिक आन बान शान का
जो देखे बुरी नजर से
उठाओ तलवार
भारत माँ के सपूतो
कर दो अलग सर को धड़ से !
भले कट जाये सर
मेरे देश के सपूतो
कह दो दुनिया वालो से
हम भी नहीं हैं कम
भारत माँ की चरणों में
जान दे देंगे हँस के !
अरे ! देश के दुश्मनो
जितने बाहए हैं लहूँ तूने
भारत माँ की बेटो पर
एक -एक का बदला लेंगे
आज हम इंसाप करेंगे
देश द्रोहियो को माफ़ न करेंगे
कश्मीर हैं हिन्दुस्तान का
सीना तान के कहेंगे !
अरे ! सुन हिन्दुस्तान का
बिगडे संतान , पाकिस्तान
इतना ना बन हैवान
कान खोल के सुन ले
कश्मीर हैं हिन्दुस्तान का !
जिस दिन जाग खडे होंगे
ज्वालामुखी बन जायेंगे
अरे न लो तुम
देश के दुश्मनो
सहनशक्ति का परीक्षा
हिन्दुस्तान का !
सोच उस दिन क्या होंगे
जब सारा हिन्दुस्तान
सरहद के पार खडे होंगे
जय हिंद की अनुगुंज सुनायी देंगे
हम वीर पुत्र भारत माँ की
हमारे जान से प्यारा
देश की मिट्टी
इसकी रक्षा हम जान दे कर करेंगे
भारत माँ की कसम
जय हिंद की गीत गायेंगे
कश्मीर की कोने कोने मे
तिरंगा फहरायेंगे !!
Dushyant patel “krish”

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तू पहचान है विकास की

नारी का सोलह श्रृंगार
नेत्र का आकर्षण है,
किन्तु उसका शिक्षित व्यवहार
विकसित देश का दर्पण है…

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समझ नहीं आता

तू दर्द है…या दर्द की दवा
समझ नहीं आता

मेरे हर वक़्त में तू…या तू ही मेरा हर पल
समझ नहीं आता

तुझसे मेरी हंसी…या मेरी हंसी ही तू
समझ नहीं आता

मेरे दिल में तू…या ये दिल है तेरा
समझ नहीं आता

तेरे बारे में सोचती हूँ…या खुद को भूल गयी हूँ
समझ नहीं आता

तुझे पाकर खुश हूँ…या याद कर के
समझ नहीं आता

तेरी फ़िक्र करती हूँ…या खोने से डरती हूँ
समझ नहीं आता

तू मेरा प्यार है…या जीने का ज़रिया
समझ नहीं आता

तू मुझे मिला…या मैंने तुझे पाया
समझ नहीं आता

मैं समझना नहीं चाहती…या इस नासमझी में ही खुश हूँ
मुझे ” समझ नहीं आता “

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माँ

“हर पल मुझे जीना सिखाती है माँ
थक जाता हूँ मैं तो मुझे सुलाती है माँ
सूरज सी गर्मी चंदा की ठंडक मुझे देती है माँ
जब जब मैं रोता हूँ मुस्कुराके गले लगाती है माँ
हर पल मुझे जीना सिखाती है माँ
माँ के पहलु में मेरा हर गम मेरा छिप जाता है
मेरे सुने पन की परेशानियों का हर हल निकल जाता है
अपनी परेशानिया किसी से कहती नहीं है माँ
बीटा अगर रोये तो खुद भी रोती है माँ
हर पल मुझे जीना सिखाती है माँ”….

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शनिवार, 24 अक्टूबर 2015

मौत की कहानी उसी की ज़ुबानी

मैं तेरे बाद नहीं तू मुझसे पहले है
ऐे ज़िन्दगी
मैं तेरे साथ सही पर तू मुझसे आबाद है
ऐे ज़िन्दगी

मेरा नाम सुनकर
लोग थर-थर कांपते
तेरा आहट पाते ही
ख़ुशी में झूम जाते

हम एक ही सिक्के के दो चेहरे हैं
फिर क्यों है तू आज़ाद और मुझपर पहरे हैं

तू शुरुआत तो मैं अंत हूँ
तू अर्थात तो मैं आज भी एक प्रश्न हूँ

क्यों बस तुझे है मिली बांटने को हंसी
मैं नहीं चाहता छीनना किसी की ख़ुशी

कैसे समझाऊं, मैं तो पूर्णविराम हूँ
कैसे समझाऊं, मैं जीवन का आखरी विश्राम हूँ

सफर है ये ज़िन्दगी
तो मंज़िल हूँ मैं
तम्मन्ना है ये ज़िन्दगी
तो हासिल हूँ मैं

जीवन की डोर थाम
पर मुझसे फेर ना मुँह
तेरे शरीर नष्ट होगा
पर अमर रहेगी तेरी रूह

जो जियेगा तू औरो में
तो मैं तुझे ज़िंदा रखूंगा
जो मरेगा तू बस अपना बनकर
तो मैं तुझे मुर्दा कहूँगा

मौत ने कुछ देर कर दी
तो ज़िंदा हो तुम
उधार की थी ये ज़िन्दगी
क़र्ज़ थी ये ज़िन्दगी
इक मौत ही तो है
जिसे कमाए हो तुम

यूँ ना मानो की ज़िन्दगी जीते- जीते
इक दिन अचानक मौत आ जाती है
कुछ यूँ समझो की मौत के ठीक पहले
के कुछ पल को ही ज़िन्दगी कहते हैं…

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जय जय हिन्द कि नारी

जय जय हिन्द की नारी
खिले जाये जिंदगी तिरंगे सी तुम्हारी,
समस्याए मिट जाये सारी तुम्हारी
देवकी सी महतारी , पन्ना सी ममता की फुलवारी
झुका दे कायनात सारी , करदे एक करामात न्यारी
आवाज से अपनी करदे बुलंद सृष्टी सारी
बिना डर के तोड़ दे सारे बंधन संसारी
तुझे अबला कहने वालो को दे दे हार करारी
जय जय हिन्द की नारी
कुंठित रहकर कब तक बनी रहेगी बेचारी
अब तक ज़माने से तू बार बार है हारी
अब बगावत करने की है तेरी बारी
ज़माने ने तुझे पीङा और कष्ट बहुत दिए
अस्तित्व को मिटाने के प्रयत्न हजार किये
कभी बेटी तो कभी बहु के रूप में तेरे पंख काट दिए
अब बचाने है पंख खुद के,बदलने है दस्तूर ज़माने के
भरनी है ऊँची एक उड़ान अम्बारी
जय जय हिन्द की नारी
बना दिया तेरा जीवन इतना दुखदायी
अग्नि परीक्षा के लिए हर बार तुझको ही आवाज लगाई
हर युग में रावण ने की गलती , पर सजा तूने ही पायी
दम्भ नर का नष्ट कर दे ,नर नारी का भेद ख़त्म कर दे
आसमान की ऊंचाइयों को खुद का गुलाम कर दे
मोह लेता है आज भी तेरा रूप श्रृंगारी
जय जय हिन्द की नारी , जय जय हिन्द की नारी !!!!!!!!!!

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जब छोटी थी मैं बाबा
तेरे घर की आरजू आन थी
खिलते गुलाब की सानी
तेरी बगिया की शान थी
मेरी हर खता तुझे परेशान करती थी
मेरी बढ़ती उम्र तेरी फ़िक्र बढ़ाती थी
शादी से पहले मुझे इतना प्यार दिया
फिर क्यों शादी के बाद मुझे दुत्कार दिया
ना कभी मुझे कड़वे बोल कहे
ना कभी हाथ ही उठा दिया
फिर क्यों देखकर भी मेरी दुर्गति
अपना मुंह फेर लिया
बहुत कहा था मैंने बाबा
मत भेजो मुझे ससुराल
अब मैं नहीं रही जीवित
अब तो आकर मुझे संभाल!!!!!!!!!!!!1

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