hindi sahitya
गुरुवार, 13 सितंबर 2012
बेलुत्फ़ जिंदगी
बेलुत्फ़ हो गई अब, यह जिंदगी पीते पीते
अब कैसे जी पाऊंगा मैं शराब के बगैर
शायद मेरे नशीब तेरी दोस्ती का जाम
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