hindi sahitya
शनिवार, 5 जनवरी 2013
घडी कि सुई
घडी कि सुई
वसन्त ऋतु आइ
कोकिल ने कुका
पतझड से बगिया
उजड़ना न छोड़ा
शराब पिया और
शराबी हुवा मै
खुद शराब ने
पूरा पढ़े ...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें