hindi sahitya
रविवार, 29 जुलाई 2012
प्रेम
निश्चल प्रेम कैसा होता है
रातोमें जुगनू सा जगमगाता
चाँद को चांदनी से चमकता
जो हमें दिखाई नहीं देता
शायद हवा की
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