मंगलवार, 1 मार्च 2016

झूठी-सी आश

तेरी चाहत के तोहफे हैं,जो इन आँखों से बहते हैं,
नहीं तू संग फ़क्त इनको तो मेरे पास रहने दे,
महज़ आंसू बता इनको न तू अपमान कर इनका,
मेरी उल्फत के मोती हैं, तू इनको ख़ास रहने दे,
ज़माना, वक़्त और मजबूरियां मैं सब समझता हूँ,
तू जा बेशक, तू मेरे संग तेरा एहसास रहने दे
न मुझसे छीन ये उम्मीद तू मेरा नहीं होगा,
भले झूठी सही पर झूठी-सी ये आश रहने दे …

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नैनन नीर बहाए

नैनन नीर बहाए,
मुख से कहा न जाए,
प्रीत की मारी इस बिरहन को,
इक पल चैन न आये…..

प्रीत मा तुम्हरी जग को,
बैरी बनाये,
ताने देवत अपने पराये,
किस निर्मोही संग,
नैन लड़ाये…..

इस बिरहन की,
अरज तो सुन लो,
बिसरे जग इक तुम न बिसरों,
प्रीत की हमरी लाज तो रख लो……

विष का प्याला पी जायेंगे,
हम भी मीरा बन जायेंगे,
पहन की भगवे,
हम भी जोगिन कहलायेंगे ।

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अपना हमें बना लेना ...

हमको ख्वाबों में ख्यालों में तुम बसा लेना,
अपने होठो पे हमको गीतों-सा सजा लेना,
हम क़यामत तलक न साथ तेरा छोड़ेंगे,
हम हैं हाज़िर, हमें जब चाहे आजमा लेना,

कोई महफ़िल हो या तन्हाई का आलम कोई,
बड़ी मशरूफ़ रहो या रहो खोयी-खोयी ,
हर घड़ी साथ निभाने का तुमसे वादा है,
जी में जब आये, हमें बेझिझक बुला लेना,

साथ कोई दे न दे तेरा कहीं कोई बात नहीं,
जलते अंगारे-से दिन हो या सर्द रात सही,
खुद को तन्हा ना समझना ना करना गम कोई,
हम तुम्हारे ही हैं,अपना हमें बना लेना ..

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मृत्यु और जीवन ..............( लेजेन्ट ऑफ़ फैन भगत सिंह 2016)

मृत्यु और जीवन …………..( लेजेन्ट ऑफ़ फैन भगत सिंह 2016)

जीवन की सबसे बड़ी सचाई की जो इस दुनिया में आया है उसे जाना ही होगा
बस फर्क इतना है कोई वक़्त से पहले चला जाता है और कोई वक़्त के बाद
जीवन बड़े अनोखे कर्मो से मिला है इस दुनिया में आये हो तो कुछ करके जाओ
कुछ का मतलब देश का और परिवार का नाम रोशन करो ना की नाम डुबाओ
जीवन बड़ी मुश्किलो से मिलता है इसे नशे में मत डुबाओ क्योकि नशा वो तेज़ाब है
जिसमे जीवन को अगर डुबाया तो जीवन खत्म |
जीवन का एक मात्र लक्ष्य है की तुम्हे जीवन किसी कारणवश मिला है
दुनिया में नाम बनाने के लिए मिला है अगर ऐसा नहीं है तो तुमने ऐसे कौन से अच्छे
कर्म किये है जो तुम्हे जीवन मिला, जीवन की एक मौलिक इकाई तुम्हारा सवस्थ शरीर
अगर वो नही तो कुछ नही, स्वस्थ शरीर से बड़ी कोई कमाई नहीं क्योंकि अगर तुम स्वस्थ हो
तो तुमसे अमीर कोई नहीं और अगर सब कुछ होते हुए भी तुम्हारा शरीर स्वस्थ नहीं तो तुमसे गरीब कोई नहीं
अब मैं आपको मृत्यु के बारे में कुछ बताना चाहता हूँ
तुम मृत्यु से चाहे कितनी भी दूर भागो वो तुम्हे खोज ही लेगी
क्योंकि उसे बुलाने वाले भी आप ही हो
हमारा शरीर मिट्टी से बना है ये तो सिर्फ जलकर राख बन जाता है
मगर सच कहूँ तो इंसान उसके गुणों से जाना है उसके अवगुणो से नहीं
तुम्हे अपने कर्मो का फल जरूर भोगना होगा
कुछ ऐसा करो की लोग तुम्हारे गुणों से तुम्हे याद करें
तुम्हारी लोग मिसाले दे
तुम्हे अपना आदर्श माने……….कहते है कि किसी का उदाहरण देना बहुत आसान है मगर किसी के लिए
उदहारण बनना बहुत मुश्किल है कुछ ऐसा करो कि लोग तुम्हारे उदहारण दे |
जैसे मेरे आदर्श शहीदे आज़म शहीद भगत सिंह के लोग उदहारण देते है उन्हें आज के नौजवान अपना आदर्श मानते हुए गर्व महसूस करते है जिन्हे मैं खुद अपना आदर्श मानता हूँ शहीदे आज़म शहीद भगत सिंह जी का नाम ही लोगो के दिलो में जूनून पैदा कर देता है |

लेखक :- साहिल शर्मा s /o मनोज शर्मा ( लेजेन्ट ऑफ़ फैन भगत सिंह 2016)
संपर्क :- +91 9896976601
+91 8570066412

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बेटियां ...( लेजेन्ट ऑफ़ फैन भगत सिंह 2016)

बेटियां …( लेजेन्ट ऑफ़ फैन भगत सिंह 2016)

बेटियों को क्यों माना जाता है (अभिशाप)
आज के ज़माने में तो बटी को ही गला घोंट कर मर देता है खुद बेटी का बाप |

जिस उम्र में बेटी की उम्र होती है झूले झूलने की
फांसी लगाकर, इज्जत लूटकर इज्जत वीरान कर देते है हमारी बेटियों की

सच कहु तो बेटियों को माना जाना चाहिए भगवन
क्यों दे दिया जाता एक बेकसूर बेटियों को कलंकनी और अभिशाप का नाम ……..

क्या इस दुनिया में आने का बेटी करती है कोई गुनाह
आज के इस कलयुग में बेटी से अच्छी क्या कोई चीज़ है यहाँ

दुल्हन दहेज़ से बड़ी होती है
मगर दहेज़ देने के बाद वो जिंदगी भर रोटी है

दहेज़ के चक्कर में बेटियों को जल दिया जाता है
जो बेटी अपने घर से दहेज़ न लाये उसे एक गुनहगार समझा जाता है

हमें बदलनी होगी अपनी सोच
क्योकि दहेज़ के चक्कर में बेटी जलकर फांसी लगाकर मर रही है रोज …..

हमें दहेज़ प्रथा बंद करनी पड़ेगी
क्योकि तभी अच्छी सास, अच्छी सासु और बेटी अच्छी बहु बनेगी

इसे बंद करवा दो इस पर करके केस
क्योकि इसी के बंद होने के बाद बढ़ सकेगा हमारा देश

घर की इज्जत होती है बेटियां
आगे बढ़कर नाम कमेटी है बेटियां

देश के लिए कुछ भी कर दिखती है बेटियां
साइना नेहवाल जैसी होती है बेटियां

लड़को के पीछे मारी जाती है बेटियां
लड़को से भी ज्यादा अच्छी होती है बेटियां

लड़के रुलाते है और सबको हँसाती है बेटियां
सूरज की पहली किरण सी होती है बेटियां

परिवार के लिए सब कुछ खो देती है बेटियां
मगर कन्या भूर्ण हत्या से नही बच पति है बेटियां

दहेज़ के चक्कर में जल जाती है बेटियां
फूल से भी नाजूक होती है बेटियां

परिवार के पीछे जान कुर्बान कर देती है बेटियां
भारत की शान होती है बेटियां

बेटियों से बड़ा कोई इनाम नहीं
बेटियों को मर डालना कोई अच्छा काम नहीं

बेटियां चाहे तो दिन रात कमा सकती है
और अपने पुरे परिवार को एक साथ बैठाकर खिला सकती है

बेटी बन सकती है भारत की शान
और कर सकती है अपने पुरे परिवार और देश का रोशन नाम

बेटी को पढ़ना है
और भारत आगे बढ़ाना है

लेखक :- साहिल शर्मा s /o मनोज शर्मा ( लेजेन्ट ऑफ़ फैन भगत सिंह 2016)
संपर्क :- +91 9896976601
+91 8570066412

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(शहीदो की कुर्बानी)........( लेजेन्ट ऑफ़ फैन भगत सिंह 2016)

(शहीदो की कुर्बानी)……..( लेजेन्ट ऑफ़ फैन भगत सिंह 2016)

1 . शहीदो ने कुर्बानी दी थी हमारे देश के लिए |
उन्होंने अपनी जान से भी ज्यादा देश को चाहा था
2 . उन्होंने न तो अपने परिवार के बारे में सोचा और न ही अपने बारे में
उन्होंने सोचा सिर्फ अपने देश के बारे में,अपने देश के भविष्य के बारे में,अपनी मातृ भूमि के बारे में
3 . वो एक माँ की गोद में से निकल कर दूसरी माँ की गोद में गए और उन्हें,
उस माँ की गोद में ऐसी नींद आई वो हमेशा के लिए उस ही माँ की गोद में सो गए और, वो माँ हमारी मातृ भूमि है
4 . 23 मार्च 1931 को एक ऐसा दिन जिस दिन तीन वीर सपूतो को कानून के विरुद्ध सांयकाल में एक दिन पहले फांसी दे दी गई ………
(उन वीर सपूतों क्रांतिकारियों को समर्पित )
(शहीदे आज़म शहीद भगत सिंह), (शहीद चन्द्र शेखर आज़ाद, शहीद राज गुरु, शहीद सुखदेव, शहीद रामप्रसाद बिस्मिल, शहीद बुटकेश्वर दत्त, शहीद अशफ़ाक़ुल्ला खान……
इन सभी क्रांतिकारियों का सपना, इनकी इच्छा, इनका मकसद सिर्फ आज़ादी |
शायद ये सभी क्रान्तिकारी जानते थे की हम अपने सपने को पूरा होते हुए अपनी आँखों से नही देख सकेंगे
तो हमारी आने वाली पीढ़ी हमारे देश का आने वाला भविष्य हमारे नौजवान हमारे देश की बेटियां हमारी आँख बनेगी जो हमारे सपने को खुलकर जियेंगी |
वो हमारी इस कुर्बानी का महत्व समझेंगे |
वो हमारे देश को आगे बढ़ाएंगे
हमारी देश की बेटियां ही हमारे देश का भविष्य होंगी

(लेजेन्ट ऑफ़ फैन भगत सिंह)
ये थी हमारे उन वीर सपूतों की इच्छा उनका सपना उनका आज़ादी करवाने का मकसद |
1 . हमारे देश की बेटियां ही हमारे देश का भविष्य है मगर न जाने क्यों, हमारे ही देश के कुछ ऐसे इंसान जो हमारे ही देश की बेटियों मतलब हमारे देश के भविष्य को कुचलने की कोशिश कर रहे है |
2 . हमें उन वीर सपूतों की इच्छा उनके सपने उनकी कुर्बानी का महत्व समझना होगा |
और हमारे आने वाले भविष्य हमारी बेटियां हमारी माँ और बहन की रक्षा का जिम्मा हमें ही लेना होगा और मुँहतोड़ जवाब देना होगा उन देश द्रोहियो को जो हमारे देश के भविष्य को कुचलने की कोशिश करते है |
आइये हम प्रण लेते है की हम उन वीर सपूतों की दी हुई अमानत की हिफाजत करेंगे और अपने देश की हर बेटी की हिफाजत करेंगे
(बेटियां)
(ये कविता उन वीर सपूतों को समर्पित है जो हमारे देश के लिए हँसते हँसते अपनी जान न्योछावर कर गए और उनसे ये वादा है की हम अपने देश की बेटियों अपने देश के भविष्य आपकी अमानत की रक्षा करेंगे )
1. बेटियां है इस दुनिया की सबसे प्यारी मूरत
इसलिए होती है वो सबसे खूबसूरत
2 . बेटियों पर क्यों लगाते हो तुम दाम
बेटियां ही है सबसे बड़ा इनाम

लेखक :- साहिल शर्मा s /o मनोज शर्मा ( लेजेन्ट ऑफ़ फैन भगत सिंह 2016)
संपर्क :- +91 9896976601
+91 8570066412

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सनम पे....

जीने की लत्त तुझे हो शायद
ऐ-ज़िंदगी,
हमें तो मरने की है,हर बार
सनम पे,

————————
…..इंदर भोले नाथ……..

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जिन्दगी के तीन पहलू (लेजेंड ऑफ़ फैन भगत सिंह 2016 )

जिन्दगी के तीन पहलू (लेजेंड ऑफ़ फैन भगत सिंह 2016 )

बचपन -आइये दोस्तों मैं आपको जिन्दगी के बारे में कुछ बताना चाहता हूँ |
जिन्दगी का सबसे पहला पहलु बचपन | बचपन में बच्चे अपने छोटे छोटे जूते पहनकर स्कूल जाते हैं |
वो रंग बिरंगी किताबो में खो जाता है बचपन , खिलोनो में खो जाता है बचपन |
बचपन में हम शरारत करते है कितना अच्छा होता है बचपन |
हम कितनी भी शरारत करे हमे कोई नही डाटता, माँ की ममता और पिता का दुलार होता है बचपन
वो सुहाने स्कूल के पास कुल्फी के ठेले, अगर हम गिर जाते है तो माँ का दौड़कर आना और हमे गोद में उठाना
यही होता है बचपन , माँ की गोद में वो प्यारी सी नींद कितना प्यारा होता है बचपन
नानी दादी की परियों की कहानी शायद फिर कभी सुनने को आती ही नहीं बचपन के वो राजा और रानी |
यही है जिंदगी के पहले पहलू बचपन की कहानी

दूसरा अध्याय

जवानी – जवानी में बच्चे अपनी जिन्दगी के मालिक हो जाते है उनके ऊपर शायद ही कोई अधिकार हो उनके माँ बाप का, वो माँ बाप को माँ बाप नही सोचते, वो सोचते है की हमारे घर के नौकर और नौकरानी है, अपने माँ बाप को घर से निकल देते है, ये होती है जवानी | अरे ये सोचो जिन माँ ने तुझे ठण्ड से बचाया उसी माँ को तुने कड़कती ठण्ड में बहार निकल दिया, जिस पिता ने तुझे उंगली पकड़ कर चलना सिखाया उसी पिता की तुने उंगली काट दी | जिस माँ बाप ने तेरी ख़्वाहिश पूरी की, उन्हें ही तुने ये ख़्वाहिश मांगने पर मजबूर कर दिया की अगले जन्म में हे भगवन हमें संतान नही चाहिए |
अरे जिन्होंने तुझे इतना पाला पोस के तुझे इतना बड़ा किया उन्होंने ये सोचा था की ये होगा हमारे बुढ़ापे का सहारा, उन्हें ही घर से बहार निकल दिया और उन्हें ये कहने पर मजबूर कर दिया की ये वक़्त भी आएगा तुम्हारा ये होती है जवानी
तुम्हे भी सलाह देता है हमेशा करना आदर अपने माँ बाप का क्यूंकि आगे तुम्हारा भी आने वाला है बुढ़ापा |

तीसरा अध्याय

बुढ़ापा – जिंदगी का तीसरा पहलू बुढ़ापा |
किसी ने सच ही कहा है इंसान को अपने कर्मो का फल इसी जन्म में भोगना पड़ता है ये बात सच है बुढ़ापे में वो अपने कर्मो का फल भुगतते है किसी को साँस की बीमारी तो किसी को मलेरिये की तो कोई कैंसर से मरता है ये सब दुःख उसके कर्मो का फल है अगर कोई सही सलामत इस दुनिया से चला जाता है तो वो फल भी उसी के कर्मो का है मगर उनकी संतान अच्छी है तो उन्हें कोई फ़िक्र नही और अगर उनकी संतान माँ बाप से ज्यादा नशे को चाहता है माँ बाप की सेवा करने से ज्यादा वो गुंडा गर्दी करना ज्यादा पसंद करता है और अपनी बहन की रक्षा करने से ज्यादा वो ओरों की बहनो को छेड़ना पसंद करता है तो माँ बाप सोचते है की हमारी परवरिश में ऐसी कोन सी कमी रह गयी की हमे ऐसी संतान मिली , जिस उम्र में तुम्हे उनसे आशीर्वाद मिलने चाहिए उस उम्र में वो भगवन से ये मन्नत मांगते है के हे भगवन हमे अगले जन्म में ऐसी संतान नही चाहिए, आजकल के बच्चे अपनी पत्नी को सोने के आभूषण खरीद कर देते है क्या कभी उन्होंने अपनी माँ के लिए एक साड़ी भी खरीदी है अपने लिए कार अच्छी घडी एक अच्छी बाइक मगर जब पिताजी ने कहा की बेटा मेरा चश्मा टूट गया है इसे ठीक करवा दो तो बेटा कहता है की इस बुढ़ापे में तुम्हे बड़ा कलेक्टर बनना है सुबह अखबारों में भविष्य देखकर मंदिरो में दान करते हैं, और घर में माँ बाप का जिन हराम करते हैं (वो बाहर चढ़ाते है जल और सोचते हैं की माँ बाप मर जाने चाहिए कल) ये बुढ़ापा दोस्तों एक कड़वा जहर है जिसे अधिकतर लोगो को पीना पड़ता हैं |
लेजेंड ऑफ़ फैन भगत सिंह 2016 – दोस्तों मैं आपको ये बताना चाहता हूँ की हमारी जिन्दगी के पहले गुरु हमारे भगवान, हमारी जिंदगी के रचियता, हमारी खुशियों में जिनके चेहरे पर मुस्कान हैं वो ही माँ बाप हमारे भगवान हैं |
माँ बाप से बड़ा कोई मन्दिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, गिरजाघर, कोई तीर्थ नही हैं अगर हम माँ बाप को पूजते हैं तो दुनिया की कोई ताकत ऐसी नही है जो हमारी कामयाबी को हमे मिलाने से रोक सके |
आइये हम परण लेते है की हम सब अपने माँ बाप की सेवा करेंगे क्यूंकि पहले वो हमारे जिंदगी को चलने वाली लकड़ी थी और अब हम उनके बुढ़ापे का सहारा बनना होगा |

लेखक :- साहिल शर्मा S /o मनोज शर्मा
संपर्क :- +91 9896976601
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"एक सवाल हैं मेरा तुझसे"

एक सवाल हैं मेरा तुझसे ,
के तु ईतना मज़बूर क्यू हैं ?
एक पल तो गुजरता नही तनहा ,
फिर तनहा जीने का फितूर क्यू हैं ?
सज तो रहा हैं तु गैर के लिये ,
फिर चेहरे पे मेरा ही नूर क्यू हैं ?
बैठ के तो गैरो के जाम पी रहा हैं ,
फिर सर पे मेरा ही सूरूर क्यू हैं ?
औरों की नज़र मे तो गुनहगार हैं तु ,
फिर मेरी नज़र मे ही बेकसूर क्यू हैं ?
-एझाझ अहमद

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उदार बनो

एक अकेला न रहो, संसार बनो
कट्टरवाद छोड़ मेरे भाई उदार बनो

किसके स्वार्थ पे सब न्योछावर
पाप करा रहे पुण्य बताकर
सही गलत से किसका नाता
क्लेश द्वेष का है जन्मदाता
पाप-पुण्य के बीच का दीवार बनो
कट्टरवाद छोड़ मेरे भाई उदार बनो

आदि धुंध है अंत भी धुंधली
किसके हाथ की तू कठपुतली
क्यों काटों का बीज है बोना
इक दिन पड़ेगा सबको रोना
परस्पर प्रेम बढ़ाने का आधार बनो
कट्टरवाद छोड़ मेरे भाई उदार बनो

किस निर्णय में क्या स्वार्थ है
तेरी डोरी किसके हाथ है
कहाँ खो गयी विचार की शक्ति
धर्मांध हो गयी क्यों तेरी भक्ति
अर्थहीन किसी निर्णय का विचार बनो
कट्टरवाद छोड़ मेरे भाई उदार बनो

सत्य का क्या विकल्प है
सेवा ही श्रेष्ठ संकल्प है
निश्छल प्रेम जिसे हृदय तड़पता
सेवा त्याग से ही उपजता
सत्य सेवा व त्याग प्रेम का प्रचार बनो
कट्टरवाद छोड़ मेरे भाई उदार बनो

कवि – भोला शंकर सिंह ‘गोल्डी’

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Oasis !!

रेत का पानी

सावन न देखूँ, बारिश बा देखूँ
प्यासे नैनों की आस बन जाती हूँ
थके क़दमों की मन्जिल समझो
रेत का पानी सबसे कहलाती हूँ !

कोई राही चला ऊँठ पे सवार
अपने थैली में कुछ टटोले
हाथ आया जल के जैसा कुछ और
फिर चला आगे मुझे निहारे !

शाम ढले एक गडरिया दिखा
भेड़ – बकरियों की गिनती सवारे
मेरे किनारे रुके वह बेज़ुबान
प्यास बुझाकर फिर घर चले सारे !

गाँव में कहीं दूर मातम की गूँज
काले चादर में लिपटा कोई आकार
दो – चार रुडाली मुझे आईना बनाके
करने चली अपने वजूद को साकार !

अमीरों के घर मेरी बोली लगती
दुगने दामों में माथे की शिकन बन जाऊँ
कोई बटवारा करे बेदर्दी से
कहीं मासूम के आस की वजह बन जाऊँ !

मेरा कारवाँ चलता है बेहिसाब
हर दिन कितने ही किस्से जोड़ता है
तपती धूपके झोकों से सुलगकर
चाँद – तारों के साथ अनोखा रिश्ता जुड़ता है !

उम्र का हर तराज़ू मेहमान मेरा
सबकी जिंदगी का अटूट हिस्सा बन जाती हूँ
कभी चंचल, कभी अचल स्वभाव से
रेत का पानी सबसे कहलाती हूँ !!

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सोमवार, 29 फ़रवरी 2016

प्रधानी

गाँव में चुनावी माहौल है|
दबंगो के हाथों में पिस्तौल है||

घूमते फिरते हैं बनके नबाव|
वोटरों पर बनाते हैं अपना दबाव||

उम्मीदवारों को प्रधानी का बुखार है|
लगता है जैसे गाँव में त्यौहार है||

गली-गली में पंचायत लगी है|
हर दीवार विज्ञापनों से सजी है||

प्रत्याशी पिला रहे हैं वोट के बदले शराब|
लोगों की कर दी है आदत खराब||

सभी बखान कर रहे हैं अपनी ईमानदारी|
मगर वोटरों से नहीं छुपी है उनकी भ्रष्टाचारी||

प्रत्याशी दिखा रहे अपनी-अपनी दम|
नहीं पड़ रहा कोई किसी से कम||

बनके सभी आते हैं वरदाता|
वादा अपना कोई न निभाता||

परस्पर विचार कर रहे हैं मतदाता|
प्रत्याशियों की किस्मत के वही हैं विधाता||

योगेश कुमार 'पवित्रम'

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Some More Time.....

दो घड़ियाँ …

दो घड़ियाँ लेकर चलूँ मशाल
उस अँधेरे को बेबस कर दूँ
जख्म की ताकत हो जितनी
उससे दुगनी मरहम भर दूँ !

दो घड़ियाँ मैं दे दूँ आस
कुछ सपने अभी परेशान है
मेहनत पे लगे सवालों को
कयामत का इंतज़ार है !

दो घड़ियाँ छुपालूँ वक्त से
बिछड़ते साँसों की राहत सुन लूँ
दस्तक देनेवाली उल्फतों से कभी
यादों में कुछ सुकून तो चुन लूँ !

दो घड़ियाँ मैं कर दूँ कुरबान
उन अन्जान गलियों की पहचान बन जाऊँ
उन राहों की उम्मीद बनकर
जुल्मों को बेसहारा कर जाऊँ !

दो घड़ियाँ मैं बनादूँ ख़ास
कुछ जरूरतें जीने के अरमान है
रहे ना भूखा कोई, तन हर किसीका ढका
सर पर छत हो ऎसा कुछ बयान है !

दो घड़ियाँ सीख लूँ जीना
बातों में, इरादों में ठहराव हो सही
रिश्तों की कड़ियाँ होती है नाज़ुक
हर जस्बात का एहसास हो सही !

दो घड़ियाँ कर लूँ सलाम
देश की मिटटी को नाज़ों से छू लूँ
सरहद पर जो पहरे है हज़ार
उन अनगिनत कुरबानियों को दुआओं से छू लूँ !!

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breathlessboy

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Source: breathlessboy

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कीसी कमजोर लम्हे में
अगर मैं तुमसे ये कह दुं
मुझे तुमसे मोहब्बत है

तुम ये मत समझ लेना
मैने सच कहा होगा
ऐसी दिलकश बातों को
ऐसे दिलबर प्यार में कहना
मुझे खुब आता है

मेरी आखें मेरा चेहरा
मेरा ये मासुम लहजा
ये सब झुठ कहता है
मगर

इस झुठ में एक सच है
मुझे तुमसे मोहब्बत है।।।

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Meri Jindgi

Meri Jindagi

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काश मैं कवि होता

काश मैं कवि होता
स्वचंद पंखी ओ आकाश में
मैं विहग वान हजारो गढता
किसी सुंदरी की जुल्फो मैं
कभि सोता कभि खोता
काश मैं कवि होता
नित नयी कल्पना के पंख लगा
अंबर मे मैं भि उड़ता
नव पल्लव तरू की डाली
पे मैं भि कोयल सि गाता
काश मैं कवी होता
कही छुपी सायरी को बनाता
अकेले बैठे गुनगुनाता
कई अनकही बाते बताता
कई सुर ताल मिलाता
काश मैं कवि होता
बेर ओर बसंत को मिलाके
नई नई ऋतु बनाता
उनमे तुझको बुलाता
सपनो सा सजता
काश मैं कवि होता
कयी बातें अनकहि
उनसे राज खोल पाता
नयनों की भाषा तेरी
दिल में हि सुनाता
काश मैं कवि होता
आसमान पे लिखता
तेरा नाम बादलों से
प्यार से तेरे भिंग
फिर बरस पड़ता
काश मैं कवि होता
एक पल में हज़ारो
सदियां जीता जाता
ओर कयी सदियां
शब्दों में सजाता
काश मैं कवि होता

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Silence Speaks.....

मैं और मेरी तन्हाई

कितने ही सावन बीते है
पतझड़ भी कई देखे है
बारिश के उन हर लम्हों को जीते हुए
मेरी तन्हाई अक्सर कुछ छुपाते है !!

रिश्तों के दायरे में सिमट गयी
कितने हे अरमान यूँहीं कभी
आँखें मूँदें कोने में लिपटी
कितने ही ख़याल यूँहीं कभी !
उल्फतों को हँसकर जी लेते है
मेरी तन्हाई अक्सर कुछ छुपाते है !!

उम्र के हर पड़ाव पर
नयी पुरानी कुछ चुनोतियाँ
मन में सवालों को उलझाती
कुछ अनचाही मजबूरियाँ !
बेवजह बिखरकर सँभलना जानते है
मेरी तन्हाई अक्सर कुछ छुपाते है !!

हम अपना कसूर ढूँढ़ते रहे
अजनबी जस्बातों के महफ़िल में
सुकून की इतनी फितरत नहीं
के साथ दे जाए मुश्किल में !
अपने हालात पे कभी नज़र लग जाते है
मेरी तन्हाई अक्सर कुछ छुपाते है !!

कोई करे वादों का हिसाब
किसीका आरजू फरमान बना
इम्तिहान लेता सारा जहाँ
तो दुआ भी जंजीर बना !
इस कश्मकश को जीने की वजह बनाते है
मेरी तन्हाई अक्सर कुछ छुपाते है !!

दामन के धागों में अब भी
कुछ रंग अधूरे है
ख़ामोशी के सिलवटों में आज भी
कुछ अल्फाज़ अधूरे है !
जिंदा रहकर भी होश गँवारा लगते है
मेरी तन्हाई अक्सर कुछ छुपाते है !!

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रविवार, 28 फ़रवरी 2016

"यकीन मुझे भी था"

सबको पेहले से ही ये लगता था के कोई तेरा ना होगा ।
यकीन मुझे भी था के तेरे सिवाय कोई मेरा ना होगा ।
सफर मे कई हसीन चेहरे गुजरेगे सामने से मेरे पर ,
मेरी आँखो मे सिवाय तेरे किसी का चेहरा ना होगा ।
बसाई हैं मेने तेरी चाहत ईतनी ईस मुट्ठी जितने दील मै ,
मेरी शर्त हैं सारे जहाँ से समंदर भी ईतना गेहरा ना होगा ।
रोज आजाया कर ऐसे ही किसी बहाने से सामने मेरे ,
तुझे देखे बिना दिन तो होगा पर वो दिन सुनेहरा ना होगा ।
-एझाझ अहमद

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ज़ालिम ज़माना – मेरी शायरी……. बस तेरे लिये

ज़ालिम ज़माना

चुपचाप लेटा था मैं तो मौत की आगोश में
ज़ालिमों ने जलाकर ………………..
फिर भी मुझे राख कर दिया

!
!
!

शायर : सर्वजीत सिंह

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