hindi sahitya
बुधवार, 4 जुलाई 2012
तनहा और तम
कभी जिंदगी में तनहा हो,
कभी जिंदगी की राहें
सुनसान हो जाये ,
मेरे घर में आना.....
और मेरे कमरे के कोने में
बंद पड़े उस
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