hindi sahitya
सोमवार, 9 जुलाई 2012
होता है जहाँ गुज़र-बसर मेरा
होता है जहाँ गुज़र-बसर मेरा
वो शहर है, जमशेद-ए-शहर मेरा
मुड़के न देखा उस जगह को जिसे
छोड़कर चला गया हमसफ़र
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