बुधवार, 4 जुलाई 2012

ज़ख्म को फ़ूल तो सर-सर को सबा कहते हैं / फ़राज़

ज़ख्म को फ़ूल तो सर-सर को सबा कहते हैं
जाने क्या दर्द है, क्या लोभ है, क्या कहते हैं
क्या कयामत है कि जिनके लिये रुक

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