hindi sahitya
बुधवार, 12 दिसंबर 2012
अपना मन
अपना मन तो बिल्कुल जोगी
जंगल और वीराना क्या ।
भीड़ नगर की नहीं खींचती
महलों का मिल जाना क्या।।
फुटपाथों
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