गुरुवार, 13 दिसंबर 2012

आज़ादी...

आज़ादी
कुछ-कुछ वैसी ही है
जैसे छुटपन में
पांच पैसे से खरीदा हुआ लेमनचूस
जिसे खाकर मन खिल जाता था,
खुले आकाश

पूरा पढ़े ...

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें