hindi sahitya
बुधवार, 12 दिसंबर 2012
पिता का रुतबा
कलम स्याही
बार-बार करती
माँ का ही ज़िक्र
हर पन्ना सजाएँ
पिता की बात
भला क्यों नहीं होती
ये तो बताएँ
ममता की
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