सोमवार, 10 सितंबर 2012

नई सुबह

खिल गई पंखुड़ियाँ

धूप फिर निकल गई

ढ़ल गई थी जो रात में

सुबह मे बदल गई

ओस की बूँद सी

हर जगह बिखर गई

जो चली ये

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