hindi sahitya
मंगलवार, 11 सितंबर 2012
सोयी नहीं रात भर..
मैं जगती रही तेरे ही ख़्यालो में रात भर ,
कल रात थकी तो बहोत थी मैं..
पर सोयी नहीं रात भर..
ना ख़्वाब आये , ना ख़्वाब
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