hindi sahitya
मंगलवार, 11 दिसंबर 2012
लौटो
तुम लौटो, देखो यादों की गिरहें कैसे खुली हैं,
ये सांस रुके तो जिंदगी को सांस आये,
तुम्हारे लम्हों की उम्र ज्यादा हो
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