hindi sahitya
बुधवार, 12 दिसंबर 2012
हाइकु मुक्तक
उड़ ही गई \ रजनी की चूनर \ सितारों वाली ।
लगी झाँकने \ पूरब के शिखर \ ऊषा की लाली ।।
खिला गगन \ महकता -सा मन \ कलियाँ
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