बुधवार, 12 दिसंबर 2012

दोहे

1

दीपक बाती से कहे ,तुम पाओ निर्वाण ।

मेरी भी चाहत जलूँ ,जब तक तन में प्राण ।।

2

कटते -कटते कह रही,वन के मन की आग

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