शनिवार, 7 जुलाई 2012

ज़िन्दगी अब रात रानी हो गई.... [ग़ज़ल]

ज़िन्दगी अब रात रानी हो गई |
किस नज़र की मेहरबानी हो गई ॥

 

इब्त्दाए ज़िन्दगी की सुब्ह से ।

शाम

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