गुरुवार, 12 नवंबर 2015

त्याग तुम्हे तो करना होगा । गीत ।

गीत । त्याग तुम्हे तो करना होगा ।

यह जीवन जो तुम्हें मिला है
निश्चित है वरदान
कर्तव्यों के सजग प्रहरी !
पाना है सम्मान
सतपथ चाहे
दूर, जटिल हो
पर तुमको तो चलना होगा ।
त्याग तुम्हे तो करना होगा ।

देख ख़ुशी के धूमिल क्षण को
कभी न कर ठहराव
तू लाएगा एक रोशनी
भर देगा हर घाव
हर्ष और
खुशियों के खातिर
बनकर दीपक जलना होगा ।।
त्याग तुम्हे तो करना होगा ।

देख रोंगटें खड़े हो रहे
आँखों का परवाह
निर्झर सी दुःख उत्प्रेरक हैं
बन हृदय की आह
उन आँखों में
आशाओं के
स्वप्न नये कुछ भरना होगा ।
त्याग तुम्हे तो करना होगा ।

नही सार्थकता जीवन की
होगी अपने आप
चलो सपथ लें बन्द करे अब
झूठे ये प्रलाप
अन्धो को अब
अंधकार से
आखिर कब तक डरना होगा ।
त्याग तुम्हे तो करना होगा ।

हर सिक्के के दो पहलू है
मगर न हों कमजोर
ज्ञान और सतपथ की राहें
ही फैलें चहुँओर
कुछ तो पावन
कर लो काया
न्यौछावर कर तरना होगा ।
त्याग तुम्हे तो करना होगा ।

साहस रखना बड़ी बात पर
करना है प्रयोग
सिर्फ कहकहे झूठे वादे
करते बेबस लोग
मानवता की
लहर सुनामी
फैलाकर दुःख हरना होगा ।
त्याग तुम्हे तो करना होगा ।।

कुछ दुःख के अवसर जीवन में
लायेंगे बौछार
परन्तु हौसलें न टूटें
न होगी तेरी हार
हर दिल को तुम
जीत चुकोगे
भले तुम्हारा घर न होगा ।
त्याग तुम्हे तो करना होगा ।।

जैसे खिलते है प्रसून खुद
बागों में मुस्काते
ख़ुशबू देते जन जीवन को
तब जाकर मुर्झाते
भूमण्डल है
एक बगीचा
बनकर फूल बिखरना होगा ।
त्याग तुम्हे तो करना होगा ।।

सच है जीवन का वह पहलू
जिसे है सब को जीना
भौतिकता के अंधकार में
दुर्दिन के दुःख पीना
आक्षेपों के
सफल निवारण
के प्रति तुम्हे ठहरना होगा ।
त्याग तुम्हे तो करना होगा ।।

यह मत सोचो सच्चाई की
बन्द पड़ी है राहें
बढ़ते जाना नवनिर्माण कर
छोड़ सभी अफवाहें
अंतिम साँसे
रहें प्राण में
तब तक तुमको लड़ना होगा ।
त्याग तुम्हे तो करना होगा ।।

… राम केश मिश्र

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