hindi sahitya
सोमवार, 16 नवंबर 2015
मुसाफिर का सफर
आसां होता अगर जीना तो मसीहा ना होता
बेरह्म लोगों का भी होना जरूरी है दुनियॉ में
R.K.V.(MUSAFIR)
Read Complete Poem/Kavya Here
मुसाफिर का सफर
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें