काश के ज़माने भर के गम पैमाने में आ जाते तोड देता पैमाने मैं तो शायद कुछ कम हो जाते मगर ऐसा होता नहीं है खूब तोड कर देखें हैं पैमाने ये तो आवारा बादल हैं `मुसाफिर ' बिन मौसम के भी बरस जाते हैं RKV(MUSAFIR) *****
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