सोमवार, 16 नवंबर 2015

ये मैं कैसे भुलूं

मैं समंदर के किनारे रेत पर ,लिखा नाम हूं
ये मैं कैसे भुलूं… ये मैं कैसे भुलूं
लहरों की मेहरबानी ,पे टिका नाम हूं
ये मैं कैसे भुलूं… ये मैं कैसे भुलूं
प्यार से जिसने लिखा था ,मेरा नाम शुक्रिया
अब समंदर के हवाले है ,मेरा हर इक लम्हा
किसी मयकश के जाम की ,छलकती शराब हूं
ये मैं कैसे भुलूं… ये मैं कैसे भुलूं
सफर मे जो भी मिल रहा है ,मोहलत पे उधार मे
कज़ा ले के आईना ,खडी है हर मोड पे
क्या गिला शिकवा करू तुझसे ,मेरे रहबर
मै जानता हूं मैं खाक हूं
ये मैं कैसे भुलूं… ये मैं कैसे भुलूं
RKV(MUSAFIR)
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