रविवार, 15 नवंबर 2015

पैगामे दोस्ती सरह्दों के आर पार

तेरा घर जले मेरा घर जले ,बात एक है
मरता तो आदमी है ,बात एक है.. तेरा घर जले……..
सियासत के खेल ज़ख्मों को भरने नहीं देते
चैनों अमन के फूलों को खिलने नहीं देते
बिछुड्ता तो आदमी है ,बात एक है ..तेरा घर जले………..
पसीने की दौलत से कब तक बारुद ख्ररीदोगे
हक़ीकत से मुंह मोड कर कितनी दूर चलोगे
प्यार लाज़मी है ,बात एक है..तेरा घर जले………
घर की लडाई का तमाशा अच्छा नहीं होता
खाली हाथ मिलाने से कभी कुछ नहीं होता
आटा पानी सा हो जाता है ,बात एक है ..तेरा घर जले……….
R.K.V.(MUSAFIR)
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