शुक्रवार, 13 नवंबर 2015

तकदीर से लड़ता रहा

खुशि की तलास में,
छन भर की तलास में,
गम के शैलाबो पर बैठा रहा,
बदल गई थी हमारी किस्मत,
फिर भी तकदीर से लड़ता रहा…..
बस एक इंतजार को तरस गई थी आँखें,
बिन सावन बरस रही थी आँखें,
फिर भी अपनी जिद पर अड़ा रहा,
फिर भी तकदीर से लड़ता रहा…..
खुद की तो नराज़गी हैं,
नराज हैं मेरे विधाता,
कैसी किस्मत हैं हमारी,
खुशि से पहले दे गया हैं धोखा,….
इतने गमो में जिनसे डरता रहा,
गम ही सही,
फिर भी तकदीर से लड़ता रहा…

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