किसानो ने गर छुपा लिया
फसले पुरे वर्षो का
क्या कहोगे जब भी तुम कि
तुम हो नस्ल गवारो का
मतलब से वो भर आए तो
भुखे होगे वर्षो का
छण मे कदमो मे उसके सर
होन्गे हम शहरो का
कह दू गलत मै शहर को
मतलब नही हम कवियो का
पर जो देखा है हमेशा
वही तजुर्वा वर्षो का
…..लेखक……….ROsHaN jHA (Mr.How)……..
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