"साल नया आया है”
गुलशने ज़ीस्त को महकाया है
”देखिये साल नया आया है”||
मन के नभ पर है मसर्रत की छटा
ज़िंदगानी पे नशा छाया है ||
फ़र्श पर पांव मेरे टिकते नहीं
दौर ख़ुशियों का चला आया है ||
हमने पाई है जहाँ की दौलत
हौसला क़ल्ब का सरमाया है ||
लोग आतंक से त्रस्त ”शकुंत''
सर पे क्या नक्सली भय छाया है ||
शकुंतला तरार रायपुर (छत्तीसगढ़)
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