hindi sahitya
रविवार, 15 नवंबर 2015
मुसाफिर का सफर
रिश्ता समझ नहीं आता तो लोटा दे
ज़ुबॉ पे होगा दोस्त, दिल में नहीं
R.K.V.(MUSAFIR)
****
Read Complete Poem/Kavya Here
मुसाफिर का सफर
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें