हाद्सा जब कोई दिल के तारों को छेड जाता है कोइ गीत, कोइ गज़ल, कोई कहानी दे जाता है घबराता नहीं हाद्सों से अब मैं इंतजार करता हूं वक़्त गुज़र जाता है किताब का इक सफहा और बढ जाता है R.K.V.(MUSAFIR) *****
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