रविवार, 15 नवंबर 2015

आतंकवाद का मुँह तोड जवाब!

*ऐ आतंकी ऐ गुनाहगार न कर जुल्म बेगुनाहो पर,
माँग अपने गुनाहो की माफी,
न कर जुल्म इन्सानो पर!!

* मासूमो ने बिगाडा है तेरा क्या,
पर फिर भी ले रहा है तू इन मासूमों कि जान!*

*कहते है की काम कर रहे है हम अच्छा जन्नत मिलेगी हमको,
जाओगे तुम जहन्नम मे न मिलेगी तुमको जन्नत!!!

Share Button
Read Complete Poem/Kavya Here आतंकवाद का मुँह तोड जवाब!

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें