दुनिया की बुराइयो से बच सके, इतनी ताकत तुझ में भी नही मुझ में भी नहीं ! दोनों ठहरे इंसान की औलाद, स्वंयशम्भू तो यंहा तू भी नही और मै भी नहीं !!
—:: डी. के निवातियाँ ::—-
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