शुक्रवार, 13 नवंबर 2015

इंसान की औलाद,

दुनिया की बुराइयो से बच सके,
इतनी ताकत तुझ में भी नही मुझ में भी नहीं !
दोनों ठहरे इंसान की औलाद,
स्वंयशम्भू तो यंहा तू भी नही और मै भी नहीं !!

—:: डी. के निवातियाँ ::—-

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