शनिवार, 8 अगस्त 2015

।।ग़ज़ल।।कहावत ही बदल डाली।।

।।ग़ज़ल।।कहावत ही बदल डाली।।

हमारे प्यार में दिल की मिलावट ही बदल डाली ।।
बड़ा मासूम था चेहरा दिखावट ही बदल डाली ।।

पिघल जाते है पथ्थर भी किसी का प्यार पाकर के ।।
गज़ब हो यार तुमने तो कहावत ही बदल डाली ।।

लिखा तकदीर में रब ने तुम्ही से प्यार करना था ।।
रब को दे गये चकमा लिखावट ही बदल डाली ।।

सजे थे प्यार के नगमे सजीं थीं आँख में खुशिया ।।
बड़े खुदगर्ज़ निकले तुम सजावट ही बदल डाली ।।

बने थे रास्ते तुम तक पहुचने के हजारो ही ।।
न जाने क्या मिला तुमको बनावट ही बदल डाली ।।

……. R.K.M

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