शुक्रवार, 4 सितंबर 2015

वक्त गुजरता जाता है....

जीत जाओ तो कोई अपना पीछे छूट जाता है
और हारो तो जमाना ही आगे निकल जाता है
कुछ अजीब सा दस्तूर है जिन्दगी का
लम्हें कटते नहीं पर वक्त गुजरता जाता है

हर शख्स सबसे कुछ न कुछ हर वक्त छुपाता है
कोई कह कर हँसाता है, कोई बिना कहे रुलाता है
जानकर भी क्यों कोई पहचान नहीं पाता है
लम्हें कटते नहीं पर वक्त गुजरता जाता है

जिंदगी खेल है, जुआ है, सफर है, इम्तहान है, जहर है
कहानी है या तस्वीर है, अफसाना है या फसाना है,
क्यूँ ये बात कोई मुझे समझा नहीं पाता है
लम्हें कटते नहीं पर वक्त गुजरता जाता है

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