रविवार, 4 अक्टूबर 2015

मौजो से छलक रही है जीवन

चंचल मन नीली सलोनी आँखे
तेरी जुल्फे काली घटा सावन
तू पूरब की परी रानी है
तू रूमानी शाम की आगमन

जोबन हुई कच्ची कली तू
सौरभ मधु सी भरी तन
तुम शीतल हो हिम सी
हरघडी देखे तुझे मेरी नयन

कुसुम खुशबू लायी पुरवा साथ
ज़िन्दगी को हुई ख़ुशी से मिलन
गुनगुनाने लगा मै गीत सरगम
नाच रहा मोर बनके आज मन

सपनो सी लग रही जमीं
इन्द्रधनुष सी दिल की गगन
ज्योति सी उजाला ज़िन्दगी में
प्रेम रंग में रंगी मेरी आँगन

गवाह है पूनम की चाँद
है अमिट हमारी प्रीत बंधन
दुष्यंत देख फैली हुई नुर को
मौजो से छलक रही है जीवन

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