हाइकू। चेन्नई बिभिषिका।
1-
प्रकृति क्रोध
चेन्नई ने देखा है
हुआ विनाश
2-
गाँवो के बीच
नहाती थी गलियाँ
पुलों के पार
3-
खेली प्रकृति
थर्राया है जीवन
दबती चींखें
4-
बहते लोग
डरी थी मानवता
तैरते घर
5-
अंधा सूरज
गुर्राती विजलियां
गरजे मेघ
6-
दिये उजाड़
वन बाग बसाव
भव्य घरौंदे
7-
टूटा कहर
टूट गयीं उम्मीदें
सहते लोग
8-
मानव रचे
जगमगाता दृश्य
हुआ तबाह
9-
हे भगवान
आत्मशांति फ़ैलावो
पीड़ित लोग
10-
भर दे शान्ति
दुर्दिन से निपटें
देश हमारा
@राम केश मिश्र
Read Complete Poem/Kavya Here हाइकू।तैरता घर ।
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