आंधी हो या तूफ़ान,
बढ़ते जाना अपनी शान.
पिया है हमने माँ का पय,
दान मिला है हमें अभय,
मांगेगी माटी जब भी,
दे देंगे हम अपनी जान,
सुनी है महापुरुषों की गाथा,
देश का गौरव हमें सुहाता,
जब तक दम है गायेंगे,
देश के गौरव का हम गान.
चपला चमके,गरज उठे घन,
विचल न होगा पथ से मन,
मंजिल पाने को तत्पर,
बढ़े चलेंगे सभी जवान.
इतिहास के साक्षी चाँद सितारे,
हम मिटे पर कभी न हारे,
महापुरुषों से सीखा हमने,
देश पर हो जाना कुर्बान.
अपना पथ हम स्वयं बनाते,
अरि को कभी न पीठ दिखाते,
घास की रोटी खाई हमने,
झुकने नहीं दी अपनी आन,
बढ़ते जाना अपनी शान.
——-रचना डॉ उमेश चमोला
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें