किसानो ने गर छुपा लिया
फसले पुरे वर्षो का
क्या कहोगे जब भी तुम कि
तुम हो नस्ल गवारो का
मतलब से वो भर आए तो
भुखे होगे वर्षो का
छण मे कदमो मे उसके सर
होन्गे हम शहरो का
कह दू गलत मै शहर को
मतलब नही हम कवियो का
पर जो देखा है हमेशा
वही तजुर्वा वर्षो का
इन तजुर्बो के साथ ही
अपनी भावना गाँठ रहा हूँ
शब्द हैं मेरे भावना उसकी
सोच के काव्य रच रहा हूँ
जो सम्मान हक है उनका
शहरों में बंद किताब दबा
पर जो देखा है हमेशा
वही तजुर्बा वर्षों का
……..ROsHaN jHA (Mr.How)……..
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