यही सब पूछते हैं उम्र इतनी तुमने कहाँ पाई मैं कह देता हूँ उनसे, ईश्क़ में कब लोग मरते हैं।
तुम्हारा नाम लेके मुद्दतों से जी रहा हूँ मैं॥
परवेज़ ‘ईश्क़ी’
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