रविवार, 14 फ़रवरी 2016

कुछ गजले

इस कदर तेरी करतूतो का सताया है दिल
अब तो आलम ये है कि
कलम उठाता हूँ अपने दिल के जज्बात लिखने के लिए
ये फिर तेरी बेवफाई के कारनामे उगल देती है !!!!!!

जो बात निगाहों से होती है
जुबानों में वो बात कहाँ
जिनसे मुलाकात सिर्फ ख्वाबो में होती है
साकार में उनके दर्शन की सौगात कहाँ
किनारे पर वो भी बैठे है
किनारे पर हम भी बैठे है
दिलो को मिलने से रोक ले
नदी के बहाव में वो औकात कहाँ !!!!!!!!!!!

मेरी याद में तूं मेरी भूल में तूं
मेरे सूक्ष्म में तूं मेरे स्थूल में तूं
मैं मंजूर हूँ तुझे मुझे कबूल है तूं
मैं तोड़ ना पाऊ वो उसूल है तूं
मैं जाग जाऊ तो यादो में आती है
सो जाऊ तो सपनो में आकर सताती है
तेरे साथ का वो थोड़ा समय
दिल को कितना सुकून दे जाता है
ख्वाबो में तेरी मुस्कराहट का शोर
मुझे नींद से जगा देता है
तेरी ख़ामोशी का अहसास
दिल को अचानक से डरा जाता है
भूल से भी भूल जाऊ तुम्हे दो पल
तो ये दिल खाली सा हो जाता है !!!

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