शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2016

ऐ-ज़िंदगी"...

बेशक़ आज हम तेरी हाथों के,
कठपुतली बने हैं “ऐ-ज़िंदगी”…
वरना किसी वक़्त तूँ हमारे,
इशारों पे चला करती थी…..!!

———————————

Acct- इंदर भोले नाथ….
Slice-of-Life

Share Button
Read Complete Poem/Kavya Here ऐ-ज़िंदगी"...

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें