मंगलवार, 9 फ़रवरी 2016

मलाल ............... (ग़ज़ल) डी. के. निवातिया

जब जब भी हमने बढाए जिंदगी में कदम
राहो में हर कदम पे तेरा हमे ख्याल आया !!

चाहकर भी न चल सके हम तेरे संग संग
जिंदगी को सदा इस बात का मलाल आया !!

हमने तो बहुत चाहा था दूरियों को मिटाना
मगर मिले जब भी, लबो पे तेरे सवाल आया !!

जब भी मिले कहने को अपने दिल के जज्बात
हर मिलन से पहले उठा कोई नया बवाल आया !!

कई बार किया मुकदमा मोहब्बत ने तेरी वफ़ा पर
दिल की अदालत से हर दफा जुर्म से बहाल आया !!

वैसे तो नाम “धर्म” का रहता है दुश्मन के भी लबो पर
एक न आना तेरे लबो पे, सदा दिल को मलाल आया !!
!
!
!
डी. के. निवातिया _____@@@

Share Button
Read Complete Poem/Kavya Here मलाल ............... (ग़ज़ल) डी. के. निवातिया

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें