इस मयखाने में बैठे तरह- तरह के लोग है
कुछ को मय और कुछ मय को पी रहे है
किसी को ख़ुशी कम,किसी को गम कम है
और पीनेवाले कहते है,अभी तो मैंने पीया बहुत कम है .
झूम रहे है लोग नशे की हालात में
आये हो जैसे किसी की बारात में
गा रहे है कुछ, कुछ हंस रहे है इतना
और किसी के आँखों से बह रहा है झरना
ज्यो-ज्यो गले से उतर रहा है मय,
खो रहे है होश,फिर भी कह रहे है होश में हूँ मैं
अपनी शाम हसीन बनाने ,मयखाने में लोग आते है
कुछ का दिल टूटा होता है, कोई दिल जोड़कर आते है
कुछ अपने दिल का आग बुझाने, मय का जाम उठाते है
कुछ अपने दिलबर की खातिर ,होठों से जाम लगते है
जैसे -जैसे है शाम बीत रहा,मय लोगो पर है चढ़ रहा
कहते है लोग शाम अभी बाकी है,अभी तो मेरी एक और जाम बाकी है
दिल की प्यास जो न बुझी ,तो मय से प्यास बुझाते है
दिल का दरवाजा बंद हुआ ,तो मयखाने की ओर आते है
कुछ मयखाने से पीकर अपने घर को जाते है
कुछ मय पीने के बाद ,सड़को पे ही सो जाते है
रात जब है बीत गई,सारी यादे मिट गई
पीनेवाले तब कहते है,अब मयखाने से रिश्ता टूट गई.

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