सोमवार, 6 अप्रैल 2015

माँ की याद

मुझे तेरी बहुत याद आती है माँ
तेरी याद तुझसे दूर होने का दर्द दे जाती है माँ
तेरे पास था तो तेरे आँचल में सो जाता था माँ
अब सोने से पहले तेरे खयालो में खो जाता हु माँ
मेरी हर तकलीफ में मुझसे ज्यादा दर्द पाती है माँ
वो भी क्या दिन थे जब अपने हाथो से खिलाती थी माँ
जब पास था तो बाहर जाने को ललचाता था माँ
अब महीनो तुझसे मिलने को तरस जाता हु माँ
तेरे दरखती अहसास की छाँव को नहीं भूल पता हु माँ
वो छाँव बरक़रार है ,अब इसी से खुद को समझाता हु माँ
तेरी ममता के मुजस्समे को मन में बसाया हुआ है माँ
मैने मन में तेरा मंदिर बनाया हुआ है माँ

Share Button
Read Complete Poem/Kavya Here माँ की याद

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें