रोज देखती हूँ उसे बटोरते हुए ख्वाबों के टूटे टुकड़े फिर उन्हें सहेज कर रखते हुए उम्मीद के पिटारे में इंतज़ार है मुझे उस पल का जब ख्वाब पिटारे में बंद नहीं होंगे हकीकत बनकर उसकी आँखों से बहेंगे … खुशियों के आंसू बनकर …..
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