मैं याचक बनकर खड़ा हूँ, मुझे दान दो श्री राम।
मेरी झोली में सत्य, नैतिकता,
बुद्धि, ईमान दो श्री राम॥
लालच की डोर से चलती कठपुतलियां बहुत हैं।
आपकी सुदंर धरती पर आप जैसे इंसान दो श्री राम॥
आपके खजाने में हैं ध्रुव, अर्जुन और एकलव्य जैसे महान।
अब आप मुझे भी परख और इन जैसी पहचान दो श्री राम॥
औरों के लिए रख बंगले, गाड़ियाँ, नोट व विलासिता।
मुझे तो समझने वाली पत्नी और बात मानने वाली संतान दे दो श्री राम॥
मेरी चाहत है आपकी दुनिया को समझ पाऊँ।
मुझे मेरे हिस्से का भूगोल, गणित और विज्ञान दे दो श्री राम॥ ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ www.sanatansewa.blogspot.in ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ
Read Complete Poem/Kavya Here ....... मुझे दान दो श्री राम। www.sanatansewa.blogspot.in
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें