बुधवार, 18 नवंबर 2015

वृद्ध कि आवाज!!!

सालों से देख रहे राहे,
आँखे तरस गई !

अपनो को मिलने का ख्वाब दिल मे लिए ,
मेरी पत्नि गुजर गई !!

आज भी याद है वो दिन ,
जब छोड गए थे वो हमे वृद्धा गृह मे !!
क्या कमी रह गई थी हमारे प्यार और संस्कारो मे !!
देख अपनो कि राहो को थक गई आँखे ,
कब बंद हो जाए ये बूढी सांसे !!

आँखो मे है क्रोध और दिल मे है ये आस ,
मिलने आ जाए मेरे बच्चे मेरे पास !!!!!!…..

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