शनिवार, 21 नवंबर 2015

साथ तुम्हारा

ग़म की तड़पाती धूप नही
खुशियों की रिमझिम होगी,
तुम साथ चलो तो जीवन की
हर मंजिल मुमकिन होगी।
सूरज की किरणों के पंछी
गीत वफा के गायेगे,
चाँद खिलेगा मुखड़े पर
चाहत की टिम टिम होगी।
सात सुरों की सरगम का
संगीत दुआयेँ देगा,
तनहाई का शोर नही जब
पायल की छ्म-छम होगी।
जब हालात की साज़िश से
सब रिश्ते नाते-टूटेंगे,
एक साथ तुम्हारा होगा
और उम्मीदों की महफिल होगी।
……………देवेंद्र प्रताप वर्मा”विनीत”

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