गुरुवार, 19 नवंबर 2015

गर्दिश मे तारे ..........!

आज हम है अकेले , आज हम है बेसहारे
क्योकि गर्दिश मे है हमारे तारे !
कभी ये तारे आसमान मे थे हमारे !
जब लगते थे, पराये भी हमारे !
वो दिन भी क्या थे ,क्या थी वो रातें,
जब सब लोग थे हमारे
घर आते-जाते!
लेकिन अब है गर्दिश में तारे,
न अपने है और न ही आसमान में है तारे!

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