बुधवार, 18 नवंबर 2015

यु न जाऊगा मैं जग से गुमनाम

यु न जाऊगा मैं जग से गुमनाम
एक दिन दुनिया ढुढेगी मेरे निशान
अश्क न व्यथ जायेगे, गुजेंगी आहे मेरी
आवाज़ मेरी रंग लाएगी|

ना सिर्फ एक रंज है आशिकी का
हर तरफ बस शोक है ख़ुशी का
दर्द बना है विष का प्याला
और कितना समेटू इसे|

अब ख़ामोश कब तक रहू
तनहाइयो को कब तक सहु
लो आज में अनकहे राज खोलता हु
दर्द, आसू और ख़ुशी के बोल बोलता हु|

सदा ही ना वीरान था मेरा गुलशन
बहार भी आई थी पुलकित था तन मन
उमंग में डूबकर मैं ख़ुशी से झूमता था
प्रेमगीत सुरों में सजा कर चूमता था|

सपनों सी सुन्दर थी ये दुनिया
हर दिन सुहाना था
राते थी सितारों से जडी
दिल में उमंगो का खजाना था
भूल जाऊ किस तरह से
तेरे खामोश निगाहों की दास्तान
याद आते है मुझे तेरी हंसी
तेरा शरमाना |

कह न सकी तुम ना मैं बोल पाया
अनकही ये दास्ता दिलो की बह रही
है आज आसू बन के आखो से|

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