मंगलवार, 7 अप्रैल 2015

मायाजाल

चिपक गया है आजकल
इंटरनेट से इंसान देखो
कैसे कैसे रूप दिखाता
बदल रहा पहचान देखो

सुन्दर चेहरा देखने को
हाथ सभी आजमाते है
मेरी भी हो दोस्त रसीली
माऊस खूब घुमाते हैं

एक हैलो के बदले
हज़ार लाइक मिलती है
सिर्फ काली आँखों में
अपनी लाइफ दिखती है

बेहया कुछ तो ये
नुस्खा भी आज़माते है
अपना हुनर दिखाने को
कपडे उतार बगाते हैं

धोखा है या सच है
कुछ समझ आता नहीं
दुल्हन ऐसी मिलती है
दूल्हा जिसे भाता नहीं

कौन किसका दोस्त है
बन गया मकड़जाल यहाँ
लड़कियां बनी है स्वीटी
और लड़के गुरुघंटाल यहाँ

हे भगवान बचा ले मुझे
इस मायाजाल से
एक सच्चा दोस्त मिला दे
हो सच्चा जो ख्याल से

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