बुधवार, 8 अप्रैल 2015

जो बीत गयीं यादें...

जो बीत गयीं यादें पीछे
उन यादों को अब याद न कर,
तेरी राह में हैं अब लोग बहुत
अब मिलने की फ़रियाद न कर।

जज़्बा-ए-दिल ग़र रखते हो
तो दिल में दफ़न कर दो यादें,
वो शख्स ग़र आये जो यादों में
तो उसको अब आदाब न कर।

कितने मीठे थे वो लम्हे
सर्दी की धूप सी वो यादें,
उन लम्हों को मुरझाने दो
अब उनको फिर आबाद न कर।

तुम दूर वहां पर रहते हो
हम आज यहां पर रहते हैं,
इन यहां-वहाँ के किस्सों में
यूँ वक़्त तू अब बर्बाद न कर।

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