गुरुवार, 9 अप्रैल 2015

दुनियादारी

कुछ लिखूँ तो
उसे सुना देना
किसी बच्चे
को बुला लेना

कहना की
दिल के अरमान है
बस सिर्फ बचपन मे
ही आराम है

तुम समेट कर
सो जाओ दिल अपना
इन अंधेरों मे देखो
नव जीवन का सपना

कोमलता दिल से
निकलने मत देना
दिल के तारों को
बिखरने मत देना

रखना प्यार पूरा जो
उपरवाले ने दिया
रहमतों का जखीरा
विरासत में जो मिला

सजाना अपनी दुनियाँ
मन के उजाले से
मधु रंगीनियाँ
आँखों के उजाले से

भोलापन तेरा खुदा करे
की रहमत बने
सब सासें ,दुआ करे
ऐसी तेरी किस्मत बने

रूह से तेरी कभी
सादगी जाये नहीं
गन्दगी दुनियादारी की
तुझे रास आये नहीं

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